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बाबा साहब अंबेडकर और धर्म

6 दिसंबर को बाबा साहब अंबेडकर का महा परि निर्वाण दिवस होता है बाबा साहब ने इस दिन अपना शरीर त्याग दिया था और इस दिन को पूरी दुनिया में एक क्रांति के रूप में मनाया जाता है|

 आज के जमाने में हम चाहे कितने भी डिजिटलाइज हो जाए या ऑनलाइन जिंदगी है फेसबुक ट्विटर सोशल मीडिया # ऐड मोमेंट  मी टू   और भी कई जो सोशल मीडिया के तहत लोगों को जोड़ें हैं हम बहुत साफ विज्ञान की बात करते हैं हमने बहुत उन्नति कर ली है पृथ्वी का पूरा तापमान गर्म हो रहा है पूरा संतुलन बिगड़ रहा है प्रदूषण का हाल बहुत बुरा है  कोरोना  ने जिंदगी को नहीं तरह से सोचने पर मजबूर कर दिया है| इन सब के बावजूद धर्म का महत्व कम नहीं हुआ विज्ञान के बढ़ने के साथ-साथ धर्म भी अपनी जगह बनाने लगा अगर विज्ञान में परिवर्तन आए चमत्कार हुए तो मंदिर अच्छे बनने लगे और डिजिटलाइज हो गया नए नए चैनल खुल गए क्षेत्र है जिसने मानव जीवन में अपना महत्व कम नहीं होने दिया और इसीलिए धर्म को छोड़कर समाज को नहीं समझा जा सकता|

 शायद यही कारण है कि बाबा साहब अंबेडकर ने धर्म को समझ कर सही दिशा में धर्म को अपनाने का रास्ता दिखाया और जब उन्होंने 6 दिसंबर  से सिर्फ 3 महीने पहले बुद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की थी तो उन्होंने यह समझाने का प्रयास किया था कि धर्म अपना धर्म को छोड़ना जरूरी नहीं है लेकिन एक वैज्ञानिक तरीके से धर्म को अपनाओ|

 बुद्ध  आपको अपने विचार को नियंत्रित करने में मजबूर करते हैं आपको बताते हैं कि अगर आप बहुत ज्यादा परेशान है बार-बार एक ही बात को सोच रहे हैं तो विपक्ष ना करें मेडिटेशन करें और उससे आप उस स्थिति से निकल सकते हैं

बुद्ध बताते हैं कि जीवन में जो जीवन की रेल अपील है जो तकलीफ है वह छीन ली है और उसके साथी आगे बढ़ना है ऐसी बहुत सारी कहानियां है तेरी गाथाएं हैं जातक कथाएं हैं जो जीवन की सभी समस्याओं का समाधान सामने प्रस्तुत कर देती है|

 धर्म को छोड़कर जैसा कि  मार्क कहते हैं या  धर्म को किनारे कर के कोई भी लड़ाई लड़ने का कोई तुक नहीं बनता क्योंकि समाज का आधे से भी ज्यादा हिस्सा इस बात को गहराई से समझता है मानता है जीता है उसकी उस महत्वपूर्ण भावनाओं को कुचल कर अब उसे अपने साथ नहीं जुड़ सकते|

 धर्म एक महान महा  आवश्यक  है हमारे जीवन में और यह बात आप नकार कर किसी भी तरह का कोई क्रांति नहीं ला सकती जब तक कि उन लोगों की महत्वपूर्ण भावनाओं को आप आदर नहीं करते जो इस धर्म को मानते हैं |

इसीलिए धर्म आपको निडर बनाता है धर्म आपको समाज से जुड़ता है धर्म आपकी कम्युनिटी करता है और धर्म आपको जीवन के सारे छोटे-मोटे कर्मों में सहयोग करता है जब यह इतना जरूरी है तो तूने इसको सही तरीके से अपनाया जाए बाबा साहब अंबेडकर का धर्म परिवर्तन का बहुत महत्वपूर्ण और गहरा विचार था और यही कारण है कि आज जो धार्मिक क्रांति हम भारत में देखते हैं कि अछूत पिछड़ा दलित जिसको की धर्म के आधार पर जाति के आधार पर समाज से  बहिष्कृत किया गया नए धर्म का  रास्ता अपनाकर अपने जीवन को बेहद महत्वपूर्ण बना सकता है|

 6 दिसंबर महा  परिनिर्वाण दिवस का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही समझा जा सकता है कि धर्म से लड़कर धर्म को खत्म करके और धर्म को गाली बक कर आप बहुत बड़ी क्रांति नहीं कर पाएंगे उसको साथ लेकर उसमें सुधार करके समाज को उससे जोड़ करके उसका वैज्ञानिक रूप प्रस्तुत करके आप समाज को बहुत बड़ा कुछ दे सकते हैं

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